ठहाकों के बीच हम-तुम

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत संदर ! पृष्ट सज्जा भी बेहद खूबसूरत ! सौब मिलिए दारूण होएछे।

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  2. अवसाद के क्षण में ठहाके ही तो सहारा होते है शेष जीवन तो प्रश्‍नों का ढेर है। सुन्‍दर कविता।

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